माँ का महत्व पर निबंध और भाषण

जब भी मदरस डे आता है, यानी मातृ दिवस आता है सोशल मीडिया पर इससे सम्बंधित स्टेटस आने लगते है, अपनी माँ के साथ अपनी फोटो शेयर करके उन्हें याद करते है। स्कूल और कॉलेज में मातृ दिवस पर निबंध और भाषण (Essay on mother in Hindi) की प्रतियोगिता शुरू हो जाती है जिसमे सभी बच्चे जोर शोर से भाग लेते है। अगर आप भी माँ का महत्व पर निबंध चाहते है तो ये पोस्ट आपके बहुत काम आएगी।

माँ का महत्व पर निबंध :- मातृ दिवस पर निबंध और भाषण (Essay on mother in Hindi)

मातृ दिवस पर निबंध

माँ शब्द अपने आप में एक पूरा शब्द है और माँ बच्चे के लिए उसकी पूरी दुनिया है। माँ के बिना न तो उनके दिन की शुरवात होती है और न ही दिन ख़त्म होता है। सुबह उठते ही उसे उसकी माँ चाहिए। यहाँ तक कि बच्चे बड़े हो जाते है तो भी चोट लगते पर या कभी कोई दुःख होता है तो वो सबसे पहले माँ को पुकारते है, चाहे माँ उसके साथ हो या नही हो।

माँ को धरती में भगवान के अवतार के रूप में जाना जाता है। ऐसा माना जाता है भगवान हर जगह एक साथ नही हो सकते इसलिए उन्होंने माँ को बनाया।
माँ वो है जिसकी वजह ये दुनिया चल रही है, उसके बिना जीवन संभव नही है। माँ 9 महीने तक बहुत कष्ट झेलती है और बेहद दर्द के बाद एक जीवन को जन्म देती है। ये दर्द इतना असहनीय होता है कि उसे माँ ही समझ सकती है। कहते है जब माँ किसी बच्चे को जन्म देती है तब उसका दूसरा जन्म होता है। कई महिलाऐं तो डिलीवरी के दर्द और कष्ट को नही झेल पाती और इस दुनिया को अलविदा कह देती है।

एक औरत सब कुछ सह लेती है लेकिन जब उसके बच्चे पर मुसीबत आती है तो वो काली माँ बन जाती है और उसे हर कष्ट और दुःख दर्द से बचा लेती है। बच्चे के बीमार होने पर वो भगवान् से उसके बच्चे की जगह उसे दुःख देने के लिए प्रार्थना करती है और कई बार भगवान् भी उसकी प्रार्थना को अस्वीकार नही कर पाते।
माँ अपना पूरा जीवन बच्चे की परवरिश में और उसके पालन पोषण में बिता देती है। वो उसके लिए कई दुखो और कष्टों को ख़ुशी ख़ुशी सह लेती है। उसके प्यार और उसके त्याग करने की महानता के कारण शास्त्रों में भी उसे सबसे ज्यादा पूजनीय माना गया है।

माँ जितना प्यार इस दुनिया में कोई नही कर सकता है। परिवार में उसका स्थान सबसे सर्वोपरी है। वो सिर्फ अपने बच्चे का पालन पोषण ही नही करती बल्कि पूरे घर को संभालती है, दिन रात घर में सभी की चिंता में अपना पूरा दिन बिता देती है। परिवार में सब अपना अपना काम करते है लेकिन माँ सबका काम करती है और कई बार इस चक्कर में वो अपना बिलकुल ध्यान नही रख पाती है।

जब बच्चे छोटे होते है तब बच्चे बार बार जग जाते है और माँ माँ करके रोने लगते है तब माँ उठती है और उसे गोदी में सुलाती है। ये क्रम रोज होता है और कई सालो तक रहता है। इन सालो में माँ की नींद पूरी नही होती है, फिर भी वो उफ़ नही करती है।

बच्चे को खाना खिलाना, उसे चलना सिखाना और उसे संस्कार भी माँ ही देती है। कह सकते है बच्चो को माँ अपने खून से और संस्कारो से सींचती है।

जब बच्चे स्कूल जाने लगते है तब उन्हें उठाने से लेकर, तैयार करना और फिर उसे जल्दी जल्दी नाश्ता और दूध देने के बाद वो भागती भागती उसे स्कूल बस तक छोडती है। उसे छोड़ने के बाद बिखरे घर को समेटने में कई घंटे लग जाते है।

बच्चे से जन्म से लेकर वो उसके साथ होती है, कह सकते है वो बच्चे की सबसे सही और अच्छी मार्गदर्शक होती है, इसलिए जितने भी महापुरुष हुए है उनकी सफलता के पीछे उनकी माँ का बहुत बड़ा हाथ है। उनकी जीवनी में उनकी माँ के योगदान का जिक्र जरुर होता है।

बच्चे को गुणवान बनाने में माँ का योगदान सर्वोपरि होता है। वो बच्चो को लाड प्यार देने के साथ साथ उसे गलत रास्ते में जाने से भी रोकती है। वो ही है जो उसे अच्छे काम करने के लिए आशीर्वाद देती है और वो ही उसे कुछ गलत करने पर सजा भी देती है, लेकिन ये सजा उसके मन को बहुत दुखाती है, इसलिए अगर माँ अपने बच्चे को डाटती है तो उसमे भी उसका प्यार छिपा होता है।

माँ का महत्व पर निबंध पढने के बाद आपको भी अपनी माँ और उनके हर उस त्याग की याद आ गयी होगी जो वो आपके लिए दिल से करती है।
अपनी माँ का सम्मान करे और उसे हमेशा खुश रखे।

 


 

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